फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाली महिला डॉक्टर पर गिरी गाज, प्रमाण पत्र रद्द।

खबरें शेयर करें -

नैनीताल जिला प्रशासन ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए चंपावत के पाटी पीएचसी में संविदा पर तैनात होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा कायथ का हलद्वानी तहसील से बना अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया है।                                       अनिल कुमार कंबोज की शिकायत के बाद हुई जांच और जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की बैठक में यह बात सामने आई कि डॉ. मनीषा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश (सोलन) की रहने वाली हैं और विवाह के बाद 2014 में उन्होंने हलद्वानी से धोबी जाति का एससी प्रमाण पत्र बनवाकर उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के जरिए नौकरी प्राप्त की थी।                                                                 सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के विधिक प्रावधानों के अनुसार, विवाह के बाद दूसरे राज्य में जाकर अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ नहीं लिया जा सकता। इस आधार पर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने 2014 में जारी प्रमाण पत्र (सं. 040201400069/266) को निरस्त करते हुए तहसीलदार को इसे जब्त करने और संबंधित विभागों को आगामी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


खबरें शेयर करें -