सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अगर सबूत पर्याप्त न हों तो ट्रायल से पहले ही केस खारिज करने की हिम्मत दिखाएं।
जस्टिस संजय करोल ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया खुद एक सजा नहीं बननी चाहिए क्योंकि आपराधिक कार्यवाही से व्यक्ति को सामाजिक कलंक और मानसिक तनाव झेलना पड़ता है.

