गंगोलीहाट गंगोलीहाट तहसील क्षेत्र से आई एक खबर, जिसमें केवल आँखें नम ही नहीं, भावुकता ही नहीं अपितु समाज को दिशा दिखाने वाली सोच भी है। पूर्व सैनिक किशन कन्याल के निधन पर उनकी 7 बेटियां उस घड़ी में आगे बढ़ी, जब समाज अक्सर चुप्पी साध लेता है। उन्होंने न केवल पिता की अर्थी को कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट पर मुखाग्नि देकर बेटे का दायित्व भी निभाया। यह दृश्य देखकर हर आंख नम और हर दिल भावुक हो उठा।
ग्राम पंचायत सिमलकोट के ऊकाला गांव में पूर्व सैनिक किशन कन्याल की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें गंगोलीहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए थे। हालत गंभीर होने पर उन्हें हल्द्वानी रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। घर लौटते ही सन्नाटा छा गया और साथ ही उठने लगे सवाल कि अंतिम संस्कार की रस्में कौन निभाएगा। उसी समय सातों बेटियां एकजुट होकर खड़ी हो गई। उन्होंने बिना किसी संकोच कहा- “पिता हमारे हैं, उनकी अंतिम विदाई भी हम ही करेंगें।
इन 7 बेटियों में तीसरे नंबर की बेटी किरन, जो CISF में तैनात हैं, उसने बेटे की भूमिका निभाते हुए मुंडन कराया, वर्दी पहनकर पिता की अर्थी को कंधा दिया और बहनों के साथ अंतिम यात्रा पर निकल पड़ीं। रामेश्वर श्मशान घाट में किरन सहित शोभा, चांदनी, नेहा, बबली और दिव्यांशी ने कांपते हाथों और भारी मन से पिता की चिता को मुखाग्नि दी। एक अन्य बहन मंजू किसी कारणवश श्मशान घाट नहीं पहुंच सकी, लेकिन उन्होंने भी पिता की अर्थी को कंधा देकर अपना फर्ज निभाया।

