धौलछीना। उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचे दिव्यांग लोक कलाकार दंपति की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं।
पति पत्नी की दिनचर्या दयनीय स्थिति । दोनों की न तो किसी संगठन ने न ही प्रशासन ने सुध ली है। इससे दोनों एक कमरे में अपने जीवन के अंतिम दिन गुजारने को मजबूर हैं।
भैसियाछाना ब्लॉक के पीपली गांव निवासी 75 साल के संतराम जन्म से ही आंखों से दिव्यांग हैं। भगवान ने उन्हें मधुर कंठ तो दिया, लेकिन देखने को आंखें नहीं दीं। जब तक उनके शरीर में जान थी वह मेले, पर्व, त्योहारों में जगह-जगह जाकर गीत
गाते रहे और लोगों का मनोरंजन करते रहे। इससे उनकी आजीविका चलती रही। वहीं, उनकी 71 व्र्श की पत्नी आनंदी देवी भी उनका साथ दिया करती थीं। बाद में दोनों बीमार रहने लगे।
इससे उनका मेलों, पर्वों में आना-जाना मुश्किल हो गया। आज हालात ऐसे हैं कि उम्र के इस आखिरी पड़ाव में वह धौलछीना में एक कमरे में जीवन यापन करने को मजबूर है।
बीमारी हो या भूख, स्वयं लड़कर अपने दिन गुजार रहे हैं। उनकी हालत को देखने और समझने वाला कोई नहीं है। यहां तक रिश्तेदारों ने भी उनसे किनारा कर लिया है। प्रशासन ने कभी उनकी सुध तक नहीं ली। व्यापार मंडल अध्यक्ष दरबान सिंह रावत ने प्रशासन से लोक गायक दंपति की मदद करने की मांग की है। जिससे उनके जीवन का अंतिम समय सुकून से गुजर सके। दरबान सिंह रावत ने कहा कि दोनों लोक कलाकारों की सहमति से उन्हें वृद्धाश्रम पहुंचना चाहिए जिससे उनकी उचित देखभाल हो सके।
