“सीएम धामी द्वारा नोटिसों पर रोक लगाने और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा प्रपत्रों की जांच कर नोटिस निरस्त करने के बावजूद पुनः नोटिस देने से लोगों में ऊबाल”
हल्द्वानी। करीब पचास साल पुरानी बसी हल्द्वानी शहर की सबसे पुरानी और सुव्यवस्थित आवास विकास कालोनी और सुभाष नगर के करीब सैकड़ों परिवारों में एक बार फिर अतिक्रमण के नाम पर आशियाने तोड़ने को नोटिस बटने से लोगों का धैर्य जबाव दे गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा नोटिसों पर रोक लगाने और बीते तीन माह पूर्व तहसील में कैंप लगाकर लोगों के रजिस्ट्री और दाखिल खारिज की गहन जांच के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ही नोटिसों को निरस्त करने के फरमान पर भी सवाल उठ रहे है। स्थानीय लोग प्रशासनिक अधिकारियों पर बेमतलब उनका मानसिक उत्पीड़न करने करने का आरोप लगा रहे है। साथ ही जल्द पंचायत कर उग्र आंदोलन की भी चेतावनी दे रहे है।
स्थानीय निवासी हरीश पांडे का कहना है कि बीते तीन माह पूर्व प्रशासन ने ही तहसील में कैंप लगाकर आवास विकास के लोगों के रजिस्ट्री और दाखिल खारिज जांच उनके नोटिस खुद से निरस्त किए थे। अब ऐसे में पुनः नोटिस देने का भला क्या औचित्य है। उधर स्थानीय निवासी मधुकर बनौला का कहना है कि पूर्व में CM भी औचित्यहीन नोटिसों पर रोक लगाने का निर्देश दे चुके है। उन्होंने पुनः नोटिस जारी करने को सिर्फ स्थानीय लोगों का मानसिक उत्पीड़न करना बताया। और जल्द मामले को लेकर पंचायत कर उग्र से उग्र आंदोलन करने तक की चेतावनी दे डाली।
