हल्द्वानी न्यूज़ दैनिक विजन से खास बातचीत में राज्य आंदोलनकारी ललित जोशी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि डंडे के बल पर अधिकार जताने वाली सरकार को जनता के प्रति अपने कर्तव्य भी निभाने चाहिए।
शहर की बदहाली का जिक्र करते हुए जोशी ने कहा कि आज हजारों सड़कें पूरी तरह टूटी-फूटी पड़ी हैं और ट्रैफिक जाम की व्यवस्था इतनी बदतर हो चुकी है कि लोग घंटों सड़कों पर फंसने को मजबूर हैं। प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है और पूरा शहर इस समय भयंकर जाम से जूझ रहा है।
ललित जोशी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाए कि इस सरकार की नीतियां जन विरोधी है। स्थानीय सरकार समय-समय पर लोगों को नोटिस भेजकर डरा रही है। बिना किसी ठोस पुनर्वास नीति के लोगों के मकानों पर लाल निशान लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध कैंची धाम के मेले में इस बार ऐसी दोषपूर्ण व्यवस्था की गई कि पूर्व की तुलना में बेहद कम संख्या में श्रद्धालु पहुंच पाए। प्रशासनिक नाकामी के कारण पर्यटकों की संख्या घटने से स्थानीय व्यापारियों में भारी रोष है। आगे बोलते हुए ललित ने कहा कि भीषण गर्मी के इस सीजन में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। जनता बूंद-बूंद पानी को तरसने पर मजबूर है।
शहर में पर्याप्त पुलिसिंग नहीं हो पाती है। हालांकि कागजों पर अपराध के आंकड़े कम दिखाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर सुरक्षा गायब है। स्थानीय सरकार ने चुनाव के समय जो भी वादे किए थे, वे कहीं भी पूर्ण होते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार केवल नियम थोपने और जनता को परेशान करने के बजाय बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करने पर ध्यान दे। शहर के युवाओं में तेजी से बढ़ती नशे की लत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जोशी ने कहा कि इस गंभीर समस्या के बारे में प्रशासन से लेकर आम जनता तक सब जानते हैं, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। रोजगार के अवसर पूरी तरह खत्म हो चुके हैं, जिससे हताश होकर युवा भटक रहे हैं और अपराध (क्राइम) की राह पकड़ रहे हैं। एक तरफ सरकार प्रदेश में शराब की 50 से ज्यादा अतिरिक्त दुकानें खुलवाने को तो तुरंत तैयार हो जाती है, लेकिन दूसरी तरफ युवाओं को रोजगार देने के नाम पर बिल्कुल हाथ खड़े कर चुकी है।
इसके साथ ही, उन्होंने एक और बड़े मुद्दे को उठाते हुए कहा कि शहर में आईएसबीटी (ISBT) बनने का सपना भी आज तक अधूरा ही रह गया है। क्षेत्र के लोग बसों के संचालन और एक आधुनिक आईएसबीटी की सुविधा को लेकर काफी उम्मीदें लगाए बैठे थे और इसके बड़े प्रभाव में थे, लेकिन लंबे समय के बाद भी यह सपना धरातल पर पूरा नहीं हो सका है।
