पिथौरागढ़: हराड़िया नाले के मलबे से रामगंगा का प्रवाह रुका, बनी खतरनाक झील, तटबंध न बनने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश।

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पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ और बागेश्वर की सीमा पर स्थित हराड़िया नाले से लगातार आ रहे मलबे और पत्थरों ने एक बार फिर रामगंगा नदी के स्वाभाविक प्रवाह को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। नदी का पानी रुकने के कारण लगभग एक किलोमीटर लंबी कृत्रिम झील का दायरा तेजी से बड़ा हो रहा है, जिससे आसपास की तलहटी में बसे गांवों और मकानों पर जलमग्न होने का खतरा मंडराने लगा है। हालांकि कुछ समय के लिए पानी का हल्का बहाव शुरू हुआ था, लेकिन पहाड़ी से लगातार आ रहे मलबे के कारण खतरा जस का तस बना हुआ है और स्थानीय लोगों में गहरी दहशत का माहौल है।

गौरतलब है कि इससे पूर्व भी जब यहाँ भारी मलबे से झील का निर्माण हो गया था, तब प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए पोकलैंड मशीनों के जरिए चैनल खोलकर सफाई करवाई थी। हालांकि, स्थायी समाधान न होने के कारण बारिश के साथ नाले से दोबारा मलबा जमा होना शुरू हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थायी तटबंध और सुरक्षा कार्यों की घोषणा की गई थी, जिसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार कर ली गई थी। इसके बावजूद इतने वर्ष बीत जाने और सरकारें बदलने के बाद भी तटबंध का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। प्रशासनिक उपेक्षा और वादों के अधूरा रहने से आक्रोशित ग्रामीणों ने झील की सुरक्षित जल निकासी और तटबंध निर्माण की जल्द से जल्द मांग की है।


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