उत्तराखंड के गदरपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक अरविंद पांडे और प्रदेश की पुष्कर सिंह धामी सरकार के बीच पिछले कुछ समय से तनाव चल रहा है। पांडे अतिक्रमण, बुक्सा समाज की जमीन विवाद और स्थानीय प्रशासनिक फैसलों जैसे कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार के खिलाफ खुलकर मुखर रहे हैं।
बड़े नेताओं की मुलाकात और सियासी मायने
इस खींचतान के बीच भाजपा के बड़े चेहरों का अरविंद पांडे के आवास पर लगातार पहुंचना शुरू हो गया है:
पहले सांसद अनिल बलूनी और अब पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनके निवास पर जाकर मुलाकात की है।
राजनीतिक जानकार इसे केवल एक ‘शिष्टाचार मुलाकात’ नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी हलचल और शक्ति संतुलन (Power Balance) से जोड़कर देख रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और धामी सरकार के बीच की राजनीतिक दूरी किसी से छिपी नहीं है, ऐसे में उनका पांडे से मिलना नए समीकरणों की ओर इशारा करता है।
अरविंद पांडे का मजबूत राजनीतिक कद
अरविंद पांडे सिर्फ एक विधायक नहीं हैं, बल्कि वे कट्टर RSS पृष्ठभूमि, मजबूत जमीनी नेटवर्क और शीर्ष नेतृत्व से सीधे तालमेल के कारण भाजपा के पुराने और मजबूत चेहरों में गिने जाते हैं। यही वजह है कि आलाकमान उनके मामले में कोई भी जल्दबाजी या जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।
आगामी चुनाव और पार्टी की चिंता
पिछले चुनाव में भाजपा ऊधमसिंह नगर जिले की 9 सीटों में से केवल 4 पर ही जीत पाई थी।
इस बार पार्टी का लक्ष्य “9 में से 9” सीटें जीतने का है।
ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी भी अंदरूनी लड़ाई को बाहर नहीं आने देना चाहता, जिससे चुनावी समीकरण बिगड़ें।
निष्कर्ष: गदरपुर की यह राजनीतिक हलचल अब सिर्फ स्थानीय नहीं रह गई है, बल्कि इसकी गूंज देहरादून से लेकर दिल्ली तक सुनाई देने लगी है।
