एक युगांतरकारी फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने ‘पैदल चलने के अधिकार’ (Right to Walk) को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया है। अदालत ने साफ किया कि सड़कों और फुटपाथों पर पहला हक मोटर वाहनों का नहीं बल्कि राहगीरों का है, इसलिए फुटपाथों पर अतिक्रमण करना नागरिकों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। इसी के साथ, कोर्ट ने सभी नगर निगमों व स्थानीय निकायों को सुरक्षित फुटपाथ बनाने की कानूनी जिम्मेदारी सौंपी है और केंद्र सरकार से पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक विशेष, समर्पित कानून (Dedicated Law) बनाने की सिफारिश की है।
नई दिल्ली: ‘पैदल चलने का अधिकार’ देश का मौलिक अधिकार।
