दिल्ली: दावों और पाबंदियों के बीच दम तोड़ती इंसानियत,,,,,,, मुंडका हादसा।

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दिल्ली के मुंडका में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 3 मजदूरों चांद, संदीप और अरुण की मौत ने एक बार फिर हमारे खोखले प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।                                                         सरकार और कागजी नियमों के मुताबिक देश में ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ (हाथ से सीवर की सफाई) पर पूरी तरह रोक है और मशीनीकृत सफाई के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। इसके बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि आज भी गरीब मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के जहरीली गैसों से भरे कुओं में उतार दिया जाता है।                                                                                          यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है, जो बार-बार इन बेकसूरों की जान ले रहा है।


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