अयोध्या भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में बीते जून महीने में दानपात्र की गिनती के समय हुई कथित चोरी और हेराफेरी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे विवाद पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एक पत्र जारी कर उन्होंने खुद पर लगे तमाम व्यक्तिगत आरोपों को पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और अनर्गल बताया है। चंपत राय ने कहा कि 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में SIT (विशेष जांच दल) की जो प्राथमिक रिपोर्ट पेश की गई थी, वह पहले बेहद गोपनीय थी लेकिन अब सार्वजनिक हो चुकी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर मौन धारण कर लिया है, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने देशवासियों और श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि जैसे ही SIT की अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट सामने आएगी, वह लगाए गए सभी आरोपों और बिंदुओं पर क्रमवार (सिलसिलेवार) तरीके से अपना पक्ष रखेंगे, जिससे पूरा सच दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए चंपत राय ने भावुक अंदाज में कहा कि संगठन ने उन्हें वर्ष 1991 में अयोध्या भेजा था और वह पिछले 45 वर्षों से एक प्रचारक के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहां भी वह रहे हैं, उनका जीवन हमेशा एक खुली किताब की तरह पारदर्शी रहा है, इसलिए उन्हें किसी भी जांच या आरोप से डरने की जरूरत नहीं है।
